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होली की प्रविष्टियों के रंगों से सराबोर इस चिट्ठाजगत को नित नूतन रंगो से संपृक्त होने की मंगल कामना के साथ होली की शुभकामनायें। इस होली पर चुनावों के रंगों मे रंगा भारत, मंहगाई के धूसर रंग में रंगी जनता और नित रंग बदलते नेताओं का रूप दिख रहा है। बहुत वर्ष पहले जय कृष्ण राय ’तुषार’ की यह कविता पढ़ी थी, आज स्मृति में आ गयी; लिख रहा हूं।

holi

यह वर्ष बेमिसाल है –
होली मनाइये।
हर शख्स फटेहाल है –
होली मनाइये।

फागुन भी कटघरे में
बसन्ती में जेल में।
यह देश हारता रहा
रिश्वत के खेल में।
मौसम भी ये दलाल है –
होली मनाइये।

रंगों में घोटाला है
मिलावट अबीर में।
छ्त्तीस का रिश्ता यहां
फगुआ-कबीर में।
मंहगा भले गुलाल है –
होली मनाइये।

सत्ता का चेहरा हो गया
पीला तो क्या हुआ?
जनता का जिस्म पड़ गया
नीला तो क्या हुआ?
हर बेवफा हलाल है –
होली मनाइये।

10 COMMENTS

  1. पता नहीं; इस साल मन्दी का कुछ असर तो त्यौहार पर होना चाहिये। पर कह नहीं सकते – हमारा असेसमेण्ट ठीक होता नहीं है।

  2. hi, its really good one. enjoyed reading the poem…by the way which typing tool are you using..? recently i was searching for the user friendly Indian language typing tool and found…”quillapd”
    would like to know that Google indic transliteration is providing only 5 Indian language and are they providing rich text options too…?
    let me know ur opinion about the same.
    http://www.quillpad.in

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