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Yellow Flowers
Flowers  (Photo credit: soul-nectar)

१)
कविता
उमड़ आयी अन्तर्मन में
जैसे उतर आता है
मां के स्तनों में दूध।

२) 
कविता का छन्द
सध गया वैसे ही
जैसे स्काउट की ताली में
मन का उत्साह।

३) 
कविता का शब्द
सज गया बहुविधि
जैसे बनने को माला
सजते हैं फूल।

४)
कविता का अर्थ
शब्दों के अन्तराल में निखर गया
जैसे रिश्ते
दोनों छोर के तनाव में।

५)
कविता का राग
बरस गया जीवन में
जैसे बरसती है ईश-कृपा
अकिंचन संसार में।

12 COMMENTS

  1. हिमांशु की कलम से निःसृत कविता को ही व्याख्यायित करती एक और उत्कृष्ट कविता !

  2. himanshu ji paanchon rachnayen gagar men sagar.

    कविता का राग
    बरस गया जीवन में
    जैसे बरसती है ईश-कृपा
    अकिंचन संसार में ।, bahut sunder , badhai

  3. बहुत ही सुंदर, कवि भी तो अपनी कविता को अपने बच्चे की तरह से प्यार करता है, सुंदर सुंदर शव्दो से उसे सजाता है.
    धन्यवाद इस सुंदर भाव के लिये

  4. हमेशा की तरह…..इस बार भी मैं लाज़वाब हो गया….रचना की बाबत कुछ भी कहने की ताब मुझमें कतई नहीं….!!
    कविता
    उमड़ आयी अन्तर्मन में
    जैसे उतर आता है
    मां के स्तनों में दूध ।
    ………..अब तक के जीवन में पढ़ी गयी सर्वश्रेष्ट उपमा है ये….!!

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