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छ्ठ पूजा : परम्परा एवं सन्दर्भ

हमारी परम्परा में विभिन्न ईश्वरीय रूपों की उपासना के लिए अलग-अलग दिन-तिथियों का निर्धारण है । जैसे...
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मुझे देखो ...

वहाँ देखो, एक पेंड़ है जगमगाता हुआ उसकी शाखो में चिराग फूलते हैं, मदहोश कर देने वाली गंध-सी रोशनी ...
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रचना क्या है, इसे समझने बैठ गया मतवाला मन

रचना क्या है, इसे समझने बैठ गया मतवाला मन

कविता ने शुरुआत से ही खूब आकृष्ट किया । उत्सुक हृदय कविता का बहुत कुछ जानना समझना चाहता था । इसी अपरिपक्व चिन्तन ने एक दशक पहले कुछ पंक्तिया...
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तुमने मुझे एक घड़ी दी थी…

तुम्हें याद है…तुमने मुझे एक घड़ी दी थी-कुहुकने वाली घड़ी । मेरे हाँथों में देकर मुस्करा कर कहा था, &...
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बालक की छतरी ...

बालक की छतरी ...

एक समय महाराष्ट्र में वर्षा न होने से भीषण जलकष्ट हुआ; पशु और मनुष्य दोनों ही त्रस्त हो गये । तब सभी ने मिलकर वर्षा के लिये ईश्वर से प्रार्थ...
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