Tuesday, February 21, 2017

Songs and Ghazals

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Songs and Ghazals.

सम्हलो कि चूक पहली इस बार हो न जाये(गज़ल)

सम्हलो कि चूक पहली इस बार हो न जाये
सब जीत ही तुम्हारी कहीं हार हो न जाये।

हर पग सम्हल के रखना बाहर हवा विषैली
नाजुक है बुद्धि तेरी बीमार हो न जाये।

अनुकूल कौन-सा तुम मौका तलाशते हो
जागो, कहीं तुम्हारी भी पुकार हो न जाये।

हर रोज जिन्दगी को रखना चटक सुगंधित
गत माह का पुराना अखबार हो न जाये।

खोना न होश, दौड़े जिस घर में जा रहे हो
तुम्हें देख बन्द उसका कहीं द्वार हो न जाये।

जी दुखी अपना यह खंडहर देखकर

कोई भाया न घर तेरा घर देखकर
जी दुखी अपना यह खंडहर देखकर।

आ गिरा हूँ तुम्हारी सुखद गोद में
चिलचिलाती हुई दोपहर देखकर।

साँस में घुस के तुमने पुकारा हमें
हम तो ठिठके थे लम्बा सफर देखकर।

अब किसी द्वार पर हमको जाना नहीं
तेरे दर पर ही अपनी गुजर देखकर।

ले प्रसाद जय बोल सत्यनारायण स्वामी की

बजी पांचवी शंखSatyanarayan Katha
कथा वाचक द्रुतगामी की।
ले प्रसाद जय बोल
सत्यनारायण स्वामी की।

फलश्रुति बोले जब मन हो
चूरन हलवा बनवाओ
बांट-बांट खाओ पंचामृत
में प्रभु को नहलाओ,
इससे गलती धुल जायेगी
क्रोधी-कामी की।

कलश नवग्रह गौरी गणपति
पर दक्षिणा चढ़ाओ।
ठाकुर जी को स्वर्ण अन्न
गो का संकल्प कराओ,
सही फलेगी खूब कमाई
तभी हरामी की।

पोथी पर पीताम्बर रख दो
भोजन दिव्य जिमाओ
हर पूर्णिमा-अमावस्या को
यह जलसा करवाओ,
फिर तो चर्चा कभीं न होगी
तेरी खामी की।

ब्राह्मण दीन लकड़हारे की
कह-कह कथा पुरानी
पंडित जी चूकते नहीं
चमकाने में यजमानी,
फोकट में खोली है दुकान
चद्दर रमनामी की।

अब तो चले जाना है

Marigold
Marigold (Photo credit: soul-nectar)

कहता है विरहित मन, कर ले तू कोटि जतन
रुकना अब हाय नहीं, अब तो चले जाना है ।

छूटेंगे अखिल सरस, सुख के दिन यों पावस
हास कहीं रूठेगा, बोलेगा बस-बस-बस
दिन में अन्धेरा अब रात ही ठिकाना है,
रुकना अब हाय नहीं, अब तो चले जाना है ।

कैसे कह पाऊँगा अपने दुःख तुमसे
मेरे तो सारे सुख दूर कहीं झुलसे
अब तो स्व-अंजलि में तिमिर ही सजाना है,
रुकना अब हाय नहीं, अब तो चले जाना है ।

अब भी पर साहस है, तेरी शुभ स्मृति का
यह लिपटी है ऐसे, ज्यों लिपटी लघु लतिका
अन्तिम जीवनक्षण तक बस याद लिये जाना है
रुकना अब हाय नहीं, अब तो चले जाना है ।

मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूँ

हर शख्स अपने साथ मैं खुशहाल कर सकूँ
मेरी समझ नहीं कि ये कमाल कर सकूँ।

फैली हैं अब समाज में अनगिन बुराइयाँ
है लालसा कि बद को मैं बेहाल कर सकूँ।

फेकूँ निकाल हिय के अन्धकार द्वेष को
कटुता के जी का आज मैं जंजाल कर सकूँ।

है प्रार्थना कि नाथ वृहद शक्ति दो हमें
चेहरा बुराइयों का मैं विकराल कर सकूँ।

ओ प्रतिमा अनजानी

ओ प्रतिमा अनजानी, दिल की सतत कहानी
कहता हूँ निज बात सुहानी, सुन लो ना।

डूबा रहता था केवल जीवन की बोध कथाओं में
अब खोया हूँ मैं रूप-सरस की अनगिन विरह-व्यथाओं में
सत्य अकल्पित-मधुरित-सुरभित, अन्तरतम में हर पल गुंजित
ओ प्रतिमा अनजानी, दिल की सतत कहानी
मुझ पर हो कर सदय, मुझे ही चुन लो ना।

संसार-सुखों की छाया का आस्वाद नहीं पाना मुझको
हो जहाँ नहीं तेरी ध्वनि वो संवाद नहीं पाना मुझको
हे प्रात-गीत, हे सुहृद मीत, मन-वीणा के तारों-सी झंकृत
ओ प्रतिमा अनजानी, दिल की सतत कहानी
हों हम एकाकार, स्नेह के स्वप्न यही तुम बुन लो ना।

स्नेहिल मिलन की सीख दे दो

Happy New Year

फ़ैली हुई विश्वंजली में, प्रेम की बस भीख दे दो
विरह बोझिल अंत को स्नेहिल मिलन की सीख दे दो।

चिर बंधनों को छोड़ कर क्यों जा रही है अंशु अब
अपनी विकट विरहाग्नि क्यों कहने लगा है हिमांशु अब
सुन दारुण दारुण व्यथा सब नव वर्ष अपनी चीख दे दो।
विरह बोझिल अंत को स्नेहिल मिलन की सीख दे दो।

ज्यों डूब जाता है सुधाकर, विश्व को आलोक दे
फ़िर उदित होता नवल वह सब दुखों को शोक दे
बढ़ते रहें आगे सदा, नव वर्ष अपनी लीक दे दो।
विरह बोझिल अंत को स्नेहिल मिलन की सीख दे दो।

परिवर्तन आने वाला है

Happy New Year

बज गयी दुन्दुभि, परिवर्तन आने वाला है।

है निस्सीम अगाध अकल्पित, समय शून्य का यह विस्तार
प्रिय देखो वह चपल विहंगम चला जा रहा पंख पसार
‘काल अमर है’ का संकीर्तन यही विहग गाने वाला है।

वह देखो गिर रहे दुखों के पीत-पात झर-झर सत्वर
उर में भी गुंजरित हो रहा मधुरिम सुख का मादक स्वर
इसी हास के शैशव का अल्हड़पन अब आने वाला है।

जीवन के कितनों रंगों से निज मन को रंगता आया हूँ
पर ‘स्नेहिल’ तेरी स्मृति से दूर नहीं मैं जा पाया हूँ
तेरी मधु यादों का संचन अंतर्मन करने वाला है।

जो बीत गया है उसे नशे की रात समझ लो स्नेहिल साथी
जो आयेगा उसे हृदय की बात समझ लो स्नेहिल साथी
आगत क्षण में हर प्रेमी ही प्रीति सुरा पीने वाला है।

आशा है हम विहंसेंगे ही प्रेम हास से बिंध जायेंगे
माधुर्य-समर्पण-प्रीत त्रिवेणी निज मानस में लहराओगे
नया वर्ष मंगलमय होकर सब पर सज जाने वाला है।
परिवर्तन आने वाला है।

मैं, मैं अब नहीं रहा

मैं, मैं अब नहीं रहा, तुम ही तो हूँ।

मैं, मैं अब नहीं रहा, तुम ही तो हूँ।

बहुत भटकता रहा खोजता
अपने हृदय चिरंतन तुमको
जो हर क्षण आछन्न रहे
ओ साँसों के चिर बंधन तुमको,
मैं जाग्रत अब नहीं रहा, गुम ही तो हूँ।
मैं, मैं अब नहीं रहा, तुम ही तो हूँ।

इस जीवन के कठिन समर में
तुम संबल बन कर आए हो
दुःख की ऐसी विकट धूप में
सुख-छाया बन कर छाये हो,
मैं ना कुछ भी विषम रहा, सम ही तो हूँ।
मैं, मैं अब नहीं रहा, तुम ही तो हूँ।

तुम ही पास नहीं हो तो..

Candle-Light
Jyoti (Photo credit: soul-nectar)

तुम ही पास नहीं हो तो इस जीवन का होना क्या है?

मेरे मन ने खूब सजाये दीप तुम्हारी प्रेम-ज्योति के
हुआ प्रकाशित कण-कण अन्तर गूंजे गान स्नेह प्रीति के
पर जो यथार्थ थे, स्वप्न हुए, तो अब बाकी खोना क्या है?
तुम ही पास नहीं हो तो इस जीवन का होना क्या है?

तेरे मधु-उपकारों से ही अब तक जीवन चलता आया
तुम हो तब ही प्राण-वायु है, तुममें तम-सा घुलता आया
तुम हो नहीं, कहाँ जीवन है? अब इसको ढोना क्या है?
तुम ही पास नहीं हो तो इस जीवन का होना क्या है?

सोचा था तेरे प्रेम बीज बोऊँगा उर के अंचल में
फ़िर तरु निकलेंगे दीर्घकाय सुख झूलेगा मन चंचल में
पर जब माटी ही उसर हो तो बीजों का बोना क्या है?
तुम ही पास नहीं हो तो इस जीवन का होना क्या है?