सच्चा शरणम्
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ज्ञात नहीं कैसे गाते हो तुम प्राणों के प्राण रे (गीतांजलि का भावानुवाद)

Geetanjali: R.N. Tagore

Tagore

I know not how thy singest, my master!
I ever listen in silent amazement.

The light of thy music illumines the world.
The life breath of thy music runs from sky to sky.
The holy stream of thy music breaks
through all stony obstacles and rushen on.

My heart longs to join in thy song,
but vainly struggles for a voice.
I would speak, but speech breaks not into song,
and I cry out baffled .
Ah, thou hast made my heart captive in the
endless meshes of thy music,
my master !

Translation In English: Pankil

ज्ञात नहीं कैसे गाते हो तुम प्राणों के प्राण रे
मैं विस्मय विमुग्ध सुनता हूँ मौन तुम्हारा गान रे

कर देता जगती को जगमग तेरा गीत प्रकाश
स्वरित श्वांस संचरणाच्छादित हो जाता आकाश
मथ देती तेरी स्वरसरिता अवरोधक पाषाण रे
ज्ञात नहीं कैसे गाते हो तुम प्राणों के प्राण रे

यह उर की अभिलाषा तेरे साथ साथ ही मीत
स्वर में स्वर संयुत कर गाऊं प्रियतम तेरा गीत
किंतु हाय अवरुद्ध कंठ निष्फल संगीत विधान रे
ज्ञात नहीं कैसे गाते हो तुम प्राणों के प्राण रे

वाणी होती स्खलित मिला सकता कैसे स्वरताल
तव अक्षय संगीत जाल में फंसा ह्रदय तत्काल
मंत्र मुग्ध हूँ प्रभु रसपंकिलसुन कर तेरा तान रे
ज्ञात नहीं कैसे गाते हो तुम प्राणों के प्राण रे

1 comment

  1. सुन्दर भावानुवाद है ..
    वही लिरिक बरक़रार है ..

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