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April 2009

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

कविता और कविता का बहुत कुछ

१) कविता उमड़ आयी अन्तर्मन में जैसे उतर आता है मां के स्तनों में दूध। २)  कविता का छन्दसध गया वैसे हीजैसे स्काउट की ताली मेंमन का उत्साह। ३)  कविता का शब्दसज गया बहुविधिजैसे बनने को मालासजते हैं फूल। ४)कविता…

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जनता तुम्हारा जूता देख रही है

मेरे जिले की एकमात्र संसदीय लोकसभा सीट ’चन्दौली’ के लिये नामांकन कार्यालय में एक प्रत्याशी, नाम तो बड़ा सुशोभन है ’भागवत’ किन्तु करनी बड़ी भोथरी है, गधे पर बैठकर और जूते की माला पहनकर नामांकन करने गया। लोकतंत्र का इतना…