Monthly Archives

May 2009

Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar

ये हुई न टिप्पणी !

टिप्पणीकारी को लेकर काफी बातें करते रहने की जरूरत हमेशा महसूस होती है मुझे । मैं इस चिट्ठाजगत में टिप्पणीकारी के अर्थपूर्ण स्वरूप को लेकर विमर्श करते रहने का हिमायती हूँ । पर आज अपनी इस प्रविष्टि में मैं किसी…

Ramyantar

पंक्ति पर टिप्पणी

                             मेरी प्रविष्टि ’बस आँख भर निहारो मसलो नहीं सुमन को’ पर तरूण ने एक टिप्पणी दी –   ‘सबसे जबरदस्त पहली लाइन’ । मेरे लिये एक…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

बस आँख भर निहारो मसलो नहीं सुमन को

बस आँख भर निहारो मसलो नहीं सुमन कोसंगी बना न लेना बरसात के पवन को । वह ही तो है तुम्हारा उसके तो तुम नहीं होबेचैन कर रहा क्यों समझा दो अपने मन को । न नदी में बाँध बाँधो…

Blog & Blogger, Hindi Blogging, Ramyantar

ब्लॉगवाणी पर अभी कुछ कार्य, सुधार शेष है

ब्लॉगवाणी का चिट्ठा संकलकों में एक प्रतिष्ठित स्थान है । ज्यादातर चिट्ठों के अनेकों पाठक इस संकलक के माध्यम से ही पहुँचते हैं । मेरे आँकड़ों में भी ज्यादातर पाठक इस संकलक से ही आते हैं । हर चिट्ठे की…

Contemplation, Ramyantar, चिंतन

अकेला होना, सबके साथ होना है ?

“मैं अकेलापन चुनता नहीं हूँ, केवल स्वीकार करता हूँ”। ’अज्ञेय’ की यह पंक्तियाँ मेरे निविड़तम एकान्त को एक अर्थ देती हैं । मेरा अकेलापन अकेलेपन के एकरस अर्थ से ऊपर उठकर एक नया अर्थ-प्रभाव व्यंजित करने लगता है । मेरा…

Ramyantar

जैनू ! तुम फिर आना

जैनू ! तुम्हें देखकर ’निराला का भिक्षुक’ कभी याद नहीं आता। पेट और पीठ दोनों साफ-साफ दीखते हैं तुम्हारे और तुम्हारी रीढ़ एकदम ही नहीं झुकतीजबकि तुम तो जानते होभिखारी के पास रीढ़ नहीं हुआ करती। जैनू !समय की आँधी…

Ramyantar

टूट गयी कोर भी

अपने ऊबड़-खाबड़ दर्द की जमीन न जाने कितनी बार मैंने बनानी चाही एक चिकनी समतल सतह की भाँतिपर कभी सामर्थ्य की कमीतो कभीं परिस्थिति का रोना रोता रहा । एक दिन मौसम बदला, और सामर्थ्य ने ’हाँ’ कीतो आशाओं, संवेदनाओं…

Poetry, Ramyantar

एक पेड़ चाँदनी लगाया है आँगने

बचपन से देवेन्द्र कुमार के इस गीत को गाता-गुनगुनाता आ रहा हूँ, तब से जब ऐसे ही कुछ गीत-कवितायें गाकर विद्यालय के पुरस्कार झटकने का उत्साह रहा करता था। आज बुखार में तपता रहा सारे दिन। कई बार बोझिल मन…

Ramyantar

आप बतायें मुझे

कल आम खाते हुए मेरी भतीजी ने मुझसे पूछा – “फलों का राजा तो आम है । फलों की रानी कौन है ? ” मैं निरुत्तर, जवाब कहाँ ढूँढ़ता – आ गया आपके पास । आप बतायें मुझे ।