Monthly Archives

May 2009

Article, Contemplation, General Articles, Literary Classics, Ramyantar, चिंतन

’लू शुन’(Lu Xun) ने कहा

“यदि आप एक ही विषय पर काम करते रहें तो अवश्य ही उसके चरम तक जा पहुँचेंगे । इसकी चिंता न करते हुए यदि आप निरंतर उसी विषय से सम्बन्धित नयी–नयी चीजों पर प्रकाश डालते रहें तो लोग समझेंगे कि…

Article, Article on Authors, Contemplation, General Articles, Literary Classics, Ramyantar, चिंतन

सूरज की मृत्यु :एन०वी० कृष्ण वारियर

आज एन०वी० कृष्ण वारियर का जन्मदिवस है। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित एन०वी० कृष्ण वारियर मलयालम साहित्य के बहुप्रतिष्ठित और समादृत कवि-साहित्यकार हैं। हिन्दी में छपे एक साक्षात्कार से इस कवि को पहले पहल जाना, और उसमें छपी इनकी कविताओं…

Contemplation, Ramyantar, चिंतन

भोर की हवा, मेरी नियति, श्लोक-पठन

हमेशा बाहर की खिड़की से एक हवा आती है और चुपचाप कोई न कोई संदेश सुना जाती है । भोर की नित्य शीतलता से सिहर गयी यह हवा क्या कहने, समझाने आती है रोज सुबह, पता नहीं ? पर फूल-पत्तियों,…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

दवा उनकी भी आजमा कर तो देखो

उन्हें नब्ज अपनी थमा कर तो देखो दवा उनकी भी आजमा कर तो देखो । अभीं पीठ कर अपनी बैठे जिधर तुमउधर अपना मुख भी घुमाकर तो देखो । दरख्तों की छाया में है चैन कितना कभी धूप में तमतमा…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

न गयी तेरी गरीबी तुम्हें माँगने न आया

न गयी तेरी गरीबी तुम्हें माँगने न आया खूँटी पर उसके कपड़ा तुम्हें टाँगने न आया । दिन इतना चढ़ गया तूँ अभीं ले रहा जम्हाई गाफिल है नींद में ही तुम्हें जागने न आया । एक अंधे श्वान सा…

Ramyantar

नर्गिस की बेनूरी या “गुण ना हेरानो गुणगाहक हेरानो हैं”

इस हिन्दी चिट्ठाकारी में कई अग्रगामी एवं पूर्व-प्रतिष्ठित चिट्ठाकारों की प्रविष्टियाँ सदैव आकृष्ट करती रहतीं हैं कुछ न कुछ लिखने के लिये । मेरे लेखन का सारा कुछ तो इस चिट्ठाजगत के निरन्तर सम्मुख होते दृश्य के साथ निर्मित होता/अनुसरित…

Ramyantar

अथ-इति

निवृत्ति की चाह रहीअथ से भीइति से भी । अथ पर ही अटका मनइति को तो भूल गयागति भी अनजान हुई ।