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Ramyantar, नाटक, नाट्य

बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – तीन

पिछली प्रविष्टियों  ’बतावत आपन नाम सुदामा – एक और दो से आगे – (प्रहरी राजमहल में प्रवेश करता है। प्रभु मखमली सेज पर शांत मुद्रा में लेटे हैं। रुक्मिणी पैर सहला रही हैं। समीप में विविध भोग सामग्री सजी पड़ी…

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बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – दो

पिछली प्रविष्टि से आगे –  दृश्य द्वितीय (द्वारिकापुरी का दृश्य। वैभव का विपुल विस्तार। धन-धान्य का अपार भण्डार। धनिक, वणिक, कुबेर हाट सजाये। संगीतागार, मल्लशाला, शुचि गुरुकुल, प्रशस्त मार्ग, गगनचुम्बी अट्टालिकाओं की मणि-माला, विभूषित अखण्ड शृंखला, सुसज्जित घने विटप एवं…

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बतावत आपन नाम सुदामा (नाट्य) – एक

दृश्य प्रथम (सुदामा की जीर्ण-शीर्ण कुटिया। सर्वत्र दरिद्रता का अखण्ड साम्राज्य। भग्न शयन शैय्या। बिखरे भाण्ड, मलिन वस्त्रोपवस्त्रम। एक कोने विष्णु का देवविग्रह। कुश का आसन। धरती पर समर्पित अक्षत-फूल। तुरन्त देवार्चन से उठे सुदामा भजन गुनगुना रहे हैं। सम्मुख…

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नल दमयंती -4

पहली, दूसरी एवं तीसरी कड़ी से आगे… पंचम दृश्य  (दमयंती स्वयंवर का महोत्सव। नृत्य गीतादि चल रहे हैं। राजा महाराजा पधार रहे हैं। सब अपने अपने निवास स्थान पर यथास्थान विराजित होते हैं। सुन्दरी दमयंती अपनी अंगकांति से राजाओं के मन और…

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नल दमयंती -3

पहली एवं दूसरी कड़ी से आगे… नल: (उसकी बाहें पकड़कर सम्हालते हुए तथा आँसू पोंछते हुए) सुकुमारी! रोना अशुभ है, अतः मत रोओ। यदि मेरे अपराध के कारण तुम रो रही हो तो उस अपराध के लिए राजा नल हाथ जोड़कर क्षमा माँगता…

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नल-दमयंती-2

पहली कड़ी से आगे… तृतीय दृश्य   (रनिवास का दृश्य। नल चकित होकर रनिवास देखता है। दमयंती का प्रवेश।) दमयंती: हे वीराग्रणी! आप देखने में परम मनोहर और निर्दोष जान पड़ते हैं। पहले अपना परिचय तो बतायें! आप यहाँ किस उद्देश्य…

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नल-दमयंती

अरविन्द जी ने शिल्पा मेहता जी के एक विशिष्ट आग्रह को पूर्ण करते हुए कुछ दिनों पूर्व नल-दमयंती आख्यान सरलतः अपने ब्लॉग पर प्रकाशित किया। नल और दमयंती की प्रणय-परिणय कथा मुझे भी आकर्षित किए हुए थी, और इसे नाट्य-रुप…

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सावित्री-6

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3, सावित्री-4 एवं सावित्री-5 से आगे…… पंचम दृश्य (जंगल का दृश्य। सत्यवान के हाथ में कुल्हाड़ी, कन्धे पर गमछा, सावित्री के हाथ में टोकरी और पानी का बर्तन) चित्र:अर्द्धेन्दु बनर्जी;स्रोत:Kamat’s Potpourri सत्यवान: सुखदायिनी! टोकरियों में पहले फल भर लिया…

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सावित्री-5

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3 एवं सावित्री-4 से आगे…… चतुर्थ दृश्य (महाराजा द्युमत्सेन की पवित्र स्थलीय आश्रम जैसी व्यवस्था। सावित्री पति के साथ सुख पूर्वक निवास करती है। आभूषण उतार कर रख देती है और गैरिक वसना हो जाती है। पति सास-ससुर की सेवा कर…

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सावित्री-4

सावित्री-1, सावित्री-2 एवं सावित्री-3 से आगे…… तृतीय दृश्य (महाराजा अश्वपति का राजदरबार। बन्दी विरद गान कर रहे हैं। आमोद-प्रमोद का हृदय हारी दृश्य। देवर्षि नारद का प्रवेश।) नारद: नारायण! नारायण! महाराजा: देवर्षि के चरणों में राजदरबार सहित अश्वपति का प्रणाम…