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भारती तेरी जय हो (सरस्वती वंदना)

Bharati Teri Jay ho

तेरी सुरभि वहन कर लायी शीतल मलय बयार,भारती तेरी जय हो!तेरी स्मृति झंकृत कर जाती उर वीणा के तारभारती तेरी जय हो! अरुणोदय में सुन हंसासिनी तव पदचाप विहंगथिरक थिरक गा रहा प्रभाती पुलकित सारा अंगतेरे स्वागत में खिल जाती…

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कब सुधिया लेइहैं मन के मीत

सहज, सरल, सरस भजन। बाबूजी की भावपूर्ण लेखनी के अनेकों मनकों में एक। छुटपन-से ही सुलाते वक़्त बाबूजी अनेकों स्वरचित भजन गाते और सुलाते। लगभग सभी रचनायें अम्मा को भी याद होतीं और उनका स्वर भी हमारी नींद का साक्षी…

Devotional, Poetry, Ramyantar, Verse Free

तुम्हारे सामने ही तो अभिव्यक्त हूँ

 (Photo credit: soul-nectar) कुछ अभीप्सित है तुम्हारे सामने आ खड़ा हूँ याचना के शब्द नहीं हैं ना ही कोई सार्थक तत्त्व है कुछ कहने के लिए तुमसे। यहाँ तो कतार है याचकों, आकांक्षियों की, सब समग्रता से अपनी कहनी कहे…

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वह डोर ही नहीं बुन पा रहा हूँ

मैं जिधर भी चलूँ मैं जानता हूँ कि राह सारी तुम्हारी ही है, पर यह मेरा अकिंचन भाव ही है कि मैं नहीं चुन पा रहा हूँ अपनी राह। मैंने बार-बार राह की टोह ली पर चला रंच भर भी…

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सच्चा की सच्ची पुकार: प्रभु आप जगो

अभी सुबह नहीं हुई है, पर जाग गया हूँ। एक अनोखी पुकार मन को वर्षों से आकर्षित करती रहती है- उसी को गुनगुना रहा हूँ- जगा रहा हूँ ईश्वर को या फिर अपने आप को, पता नहीं। इस पुकार को…