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Ramyantar

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सच्चा की सच्ची पुकार: प्रभु आप जगो

अभी सुबह नहीं हुई है, पर जाग गया हूँ। एक अनोखी पुकार मन को वर्षों से आकर्षित करती रहती है- उसी को गुनगुना रहा हूँ- जगा रहा हूँ ईश्वर को या फिर अपने आप को, पता नहीं। इस पुकार को…

Literary Classics, Ramyantar

रघुवीर सहाय की कविता से सबक लेकर

ठीक ठीक ब्लॉग लिखना शुरू करने के पहले मेरे एक ब्लॉगर मित्र ने मुझे कुछ उलाहने दिए। रघुवीर सहाय की पंक्तियों को उद्धृत कर सारांश दे रहा हूँ – “उसने पहले मेरा हाल पूछा एकाएक विषय बदलकर कहा आजकल का…

Gitanjali by Tagore, Ramyantar, Tagore's Poetry, Translated Works

गीतांजलि का भावानुवाद

मेरे पिताजी कस्बे के इंटर कालेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता थे । इस साल रिटायर कर गए। हिन्दी की प्रशंसनीय कवितायें लिखते हैं, उस ज़माने से जिस ज़माने में कविता आस्था और अस्तित्व से जुड़ा करती थी । इसलिए कभी…

Love Poems, Poetry, Ramyantar

तुम बिन बोले (कविता)

बहुत पहले जब अपने को तलाश रहा था एक कविता लिखी थी- कुछ रूमानी- कसक और घबराहट की कविता। शब्द जुटाने आते थे और उस जुटान को मैं कविता कह दिया करता था या कहूं दोस्त कह दिया करते थे।…

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उस भीड़ से इस भीड़ में

क्या कहूँ की कविता ने लुभाया बहुत और लिखने की ताब भी पैदा की, पर लिखने की रौ में मैं यह भूल गया कविता अगर आज की साज़िश का हिस्सा नहीं बनती तो वो कविता नहीं बनती । साहित्य के…