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Ramyantar

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सच्चा की सच्ची पुकार: प्रभु आप जगो

अभी सुबह नहीं हुई है, पर जाग गया हूँ। एक अनोखी पुकार मन को वर्षों से आकर्षित करती रहती है- उसी को गुनगुना रहा हूँ- जगा रहा हूँ ईश्वर को या फिर अपने आप को, पता नहीं। इस पुकार को…

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नामवर सिंह को समझते हुए

बताना जरूरी है कि नामवर सिंह के व्यक्तित्व-कृतित्व की ऊँचाई मुझ जैसे अल्पज्ञानी से काफी अधिक बैठती है। काफी तैयारी से लिख कर बोला था, वही लिख रहा हूँ -इस आशा से कि यदि पढ़ें इसे आप तो मुझे संज्ञान…

Literary Classics, Ramyantar

रघुवीर सहाय की कविता से सबक लेकर

ठीक ठीक ब्लॉग लिखना शुरू करने के पहले मेरे एक ब्लॉगर मित्र ने मुझे कुछ उलाहने दिए। रघुवीर सहाय की पंक्तियों को उद्धृत कर सारांश दे रहा हूँ – “उसने पहले मेरा हाल पूछा एकाएक विषय बदलकर कहा आजकल का…

Gitanjali by Tagore, Ramyantar, Tagore's Poetry, Translated Works

गीतांजलि का भावानुवाद

मेरे पिताजी कस्बे के इंटर कालेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता थे । इस साल रिटायर कर गए। हिन्दी की प्रशंसनीय कवितायें लिखते हैं, उस ज़माने से जिस ज़माने में कविता आस्था और अस्तित्व से जुड़ा करती थी । इसलिए कभी…

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वजह बता रहा हूँ..

कई बार ब्लॉग की जरूरत और गैर जरूरत को लेकर मित्रों से चर्चा हुई। हिन्दी भाषा में ब्लॉग लिखने को लेकर कई शंकाएँ हैं मित्रों के मन में जो मिटती ही नहीं। सबसे बड़ा सवाल उनके मन में मेरे ब्लॉगर…