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Flower-Butterfly
Photo: From Facebook-wall of Pawan Kumar

खो ही जाऊं अगर कहीं
किसी की याद में
तो बुरा क्या है?

व्यर्थ ही भटकूंगा- राह में
व्यर्थ ही खोजूंगा- अर्थ को
व्यर्थ ही रोऊंगा- निराशा के लिये,
न पाऊंगा
प्रेम, दुलार और स्नेह का आमंत्रण,
फ़िर डूब जाने को प्रेम में
खो जाने को प्रीति में,
आनन्द के असीम आकाश में उड़ने को
क्यों न मैं खो जाऊं, किसी की याद में।

उस याद का हर रूप ही साकार है
उस याद की आवाज ही झंकार है,
यदि नहीं पाऊं उसे – जो सामने हो
या कि, जिसकी बात सुननी हो मुझे
मैं कहां फ़िर ढूढ़ता उसको फ़िरूं?
फ़िर वही एक रास्ता है याद आया
खो मैं जाऊं क्यों न उसकी याद में!

वह नहीं अच्छा
है उसकी याद ही अच्छी।

9 COMMENTS

  1. “फ़िर वही एक रास्ता है याद आया
    खो मैं जाऊं क्यों न उसकी याद में!”
    सुंदर है !

  2. व्यर्थ ही भटकूंगा – राह में
    व्यर्थ ही खोजूंगा – अर्थ को
    व्यर्थ ही रोऊंगा – निराशा के लिये,
    न पाऊंगा
    प्रेम, दुलार और स्नेह का आमंत्रण,
    फ़िर डूब जाने को प्रेम में
    खो जाने को प्रीति में,
    आनन्द के असीम आकाश में उड़ने को
    क्यों न मैं खो जाऊं, किसी की याद में।
    bahut hi sundar shriman. Rachnaakar ki saphalta isi men hai ki pathak rachna ko padhkar manra mugdh ho jaye.aisa hi hua ,aap safal hue.
    main mantramugdh hoon apki rachna se.
    Dhanywad sahit badhaayee sweekar karen.

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