7 Comments 13 मैं, मैं अब नहीं रहा (कविता) By Himanshu Pandey December 29, 2008 मैं, मैं अब नहीं रहा, तुम ही तो हूँ। बहुत भटकता रहा खोजताअपने हृदय चिरंतन तुमकोजो हर…