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प्रस्तुत है गुरुदेव रवीन्द्र की पुस्तक गीतांजलि के गीत I thought that my voyage had come to its end का हिन्दी भावानुवाद।

Geetanjali: Tagore

Hindi Translation of GitanjaliI thought that my voyage had come to its end

at the last limit of my power, –
that the path before me was closed,
that provisions were exhausted and the time
come to take shelter in a silent obscurity.

But I find that thy will knows no end in me.
And when old words die out
on the tongue, new melodies break forth
from the heart; and where the old tracks
are lost, new country is revealed
with its wonders.

हिन्दी भावानुवाद: पंकिल

मैंने सोचा मेरी यात्रा का हुआ अन्त
आ गयी शक्ति की मेरे अंतिम सीमा
हो गया बन्द पथ सम्मुखस्थ पाथेय सभी
चुक गए चरण संचरण हो गया अब धीमा।

आ गया समय लेना होगा शरण हमें
अस्पष्ट रहस्यावृति मौन के आँचल में
पर तेरी अभिलाषा का कोई भी न अंत
होने वाला है मुझमें यह पाता पल में।

जब जिह्वा पर प्राचीन शब्द मर जाते हैं
नव छन्द हृदय से मेरे पड़ते फूट-फूट
साश्चर्य प्रकट हो जाते हैं नूतन प्रदेश
जब मार्ग जीर्ण पंकिल जाते हैं छूट-छूट।

गीतांजलि के अन्य भावानुवाद

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