4 Comments 91 युद्धस्व विगतज्वर By Himanshu Pandey December 29, 2008 कल के अखबार पढ़े, आज के भी। पंक्तियाँ जो मन में कौंधती रहीं- “अब जंग टालने की कवायद शुरू”। “सीमा…
9 Comments 29 निर्लज्ज तीन बार हँसाता है By Himanshu Pandey December 3, 2008 साहित्य में शील हास्य का आलंबन माना जाता है। आतंकवाद की तत्कालीन घटना के बाद पता चला कि निर्लज्ज भी…