Poems of Himanshu

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हिमांशु पाण्डेय द्वारा स्वरचित कविताएं इस श्रेणी में वर्गीकृत हैं। यह कविताएं छंदबद्ध, गीतात्मक भी हैं एवं छंदमुक्त भी हैं।

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क्यों न मेरा यह हृदय मूक-सा रहने दिया

By Himanshu Pandey

क्यों न मेरा यह हृदय मूक-सा रहने दिया? क्या करुँ उस अग्नि का निशि-दिन जले जो इस हृदय में क्या…

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जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं

By Himanshu Pandey

आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन…

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