तुम हँस पड़ते हो…
मैं अकेला खड़ा हूँ और तुम्हारे आँसुओं की धाराएँ घेर रही हैं मुझे , कुछ ही क्षणों में यह पास…
कविता श्रेणी के अन्तर्गत छंदबद्ध एवं छंदमुक्त कविताएँ संकलित की गई हैं। साथ ही ग़ज़लें, गीत, हाइकु, दोहे इत्यादि भी इसी श्रेणी में उपश्रेणियाँ बनाकर प्रकाशित की गई हैं। छंदबद्ध कविताओं के अन्तर्गत सुभाषित, भजन, क्रियात्मक गीत एवं संवाद गीत संकलित हैं तथा छंदमुक्त कविताओं के अन्तर्गत मुक्त छंद की कविताएँ, हाइकु एवं लघु कविताएँ संकलित हैं। यह कविताएँ स्वरचित भी हैं तथा अन्य कवियों की भी प्रिय रचनायें किसी विशेष प्रयोजनवश सुविधानुसार प्रकाशित की गई हैं।

मैं अकेला खड़ा हूँ और तुम्हारे आँसुओं की धाराएँ घेर रही हैं मुझे , कुछ ही क्षणों में यह पास…
(Photo credit: soul-nectar) कुछ अभीप्सित है तुम्हारे सामने आ खड़ा हूँ याचना के शब्द नहीं हैं ना ही कोई सार्थक…
मैं जिधर भी चलूँ मैं जानता हूँ कि राह सारी तुम्हारी ही है, पर यह मेरा अकिंचन भाव ही है…
एक दिन ब्रह्मा मिल जाते तो उनसे पूछता कुछ प्रश्न और अपनी जिज्ञासा शांत करता कि क्यों नहीं पहुंचती उन…
स्वीकार कर लिया काँटों के पथ को पहचाना फ़िर भी जकड़ लिया बहुरूपी झूठे सच को कुछ बतलाओ, न रखो…
नये वर्ष के आगमन पर बहुत कुछ संजोया है मन में। सम्भव है नए साज बनें हृदय के अनगिन स्नेहिल…