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सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 56-60)

By Himanshu Pandey

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्य रूपांतर दृशा द्राघीयस्या दरदलितनीलोत्पलरुचादवीयांसं दीनं स्नपय कृपया मामपि शिवेअनेनायं धन्यो भवति न च ते  हानिरियतावने…

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सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 51-55)

By Himanshu Pandey

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद   गते कर्णाभ्यर्णं गरुत एव पक्ष्माणि दधतीपुरां भेत्तुश्चित्तप्रशमरसविद्रावणफले इमे नेत्रे गोत्राधरपतिकुलोत्तंस कलिकेतवाकर्णाकृष्ट स्मरशरविलासं कलयतः ॥५१॥जो कर्णान्तदीर्घ…

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होली उत्सव: होली में कुछ मेरी भी सुन!

By Himanshu Pandey

होली में कुछ मेरी भी सुनमन, मत अपने में ही जल भुन। जब शोभित नर्तित त्वरित सरित पर वासंती चन्द्रिका…

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सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 46-50)

By Himanshu Pandey

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद भ्रुवौ भुग्ने किं चिद्‌भुवनभयभंगव्यसनिनित्वदीये नेत्राभ्यां मधुकररुचिभ्यां धृतगुणम्‌ ॥धनुर्मन्ये सव्येतरकरगृहीतं रतिपतेःप्रकोष्ठे मुष्टौ च स्थगयति निगूढान्तरमुमे ॥४६॥कुटिल…

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