बहुत दूर नहीं, बहुत पास
(१) बहुत दूर नहींबहुत पास..कहकर तुमने बहका दियामैं बहक गया। (२)एक,दो,तीन…नहींशून्य मूल्य-सत्य हैकहाफिर अंक छीन लिएमैं शून्य होकर विरम गया।…
हिमांशु पाण्डेय द्वारा स्वरचित कविताएं इस श्रेणी में वर्गीकृत हैं। यह कविताएं छंदबद्ध, गीतात्मक भी हैं एवं छंदमुक्त भी हैं।
(१) बहुत दूर नहींबहुत पास..कहकर तुमने बहका दियामैं बहक गया। (२)एक,दो,तीन…नहींशून्य मूल्य-सत्य हैकहाफिर अंक छीन लिएमैं शून्य होकर विरम गया।…
यह कविता तब लिखी थी जब हिन्दी कविता से तुंरत का परिचय हुआ था । स्नातक कक्षा की कविताओं को…
जब ध्वनि असीम होकर सम्मुख होतो कान बंद कर लेना बुद्धिमानी नहींजो ध्वनि का सत्य हैवह असीम ही है। चलोगे…
तुम बैठे रहते हो मेरे पास और टकटकी लगाए देखते रहते हो मुझे, अपने अधर किसलय के एक निःशब्द संक्षिप्त…
छत पर झुक आयी तुम्हारी डालियों के बीच देखता कितने स्वप्न कितनी कोमल कल्पनाएँ तुम्हारे वातायनों से मुझ पर आकृष्ट…
मेरी दीवार में एक छिद्र है उस छिद्र में संज्ञा है, क्रिया है, विशेषण है। जब भी लगाता हूँ अपनी…