Poems of Himanshu

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हिमांशु पाण्डेय द्वारा स्वरचित कविताएं इस श्रेणी में वर्गीकृत हैं। यह कविताएं छंदबद्ध, गीतात्मक भी हैं एवं छंदमुक्त भी हैं।

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गद्य से उभारनी पड़ रही है बारीक-सी कविता

By Himanshu Pandey

छंदों से मुक्त हुए बहुत दिन हुए कविता ! क्या तुम्हारी साँस घुट सी नहीं गई ? मैंने देखा है…

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जो कर रहा है यहाँ पुरुष (कविता)

By Himanshu Pandey

राजकीय कन्या महाविद्यालय के ठीक सामनेसंघर्ष अपनी चरमावस्था में है,विद्रूप शब्दों से विभूषित जिह्वा सत्वर श्रम को तत्पर है,कमर की…

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अखिल शान्ति है तुम्हारा ध्यान

By Himanshu Pandey

प्रेम में केवल दो अस्तित्व नहीं मिलते, बल्कि स्वयं से साक्षात्कार और रूपांतरण की एक आध्यात्मिक यात्रा भी प्रारंभ होती…

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भिक्षुक : नख-शिख वर्णन (हिन्दी कविता)

By Himanshu Pandey

कुछ दिनों पहले एक भिक्षुक ने दरवाजे पर आवाज दी। निराला का कवि मन स्मृत हो उठा। वैसी करुणा का…

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