रो उठे तुम!(कविता)
रुदन का एक दृश्य आंखों में भर गया। एक लडकी थी,रो रही थी। किसी ने उससे उसका हाथ मांग लिया…
हिमांशु पाण्डेय द्वारा स्वरचित कविताएं इस श्रेणी में वर्गीकृत हैं। यह कविताएं छंदबद्ध, गीतात्मक भी हैं एवं छंदमुक्त भी हैं।
रुदन का एक दृश्य आंखों में भर गया। एक लडकी थी,रो रही थी। किसी ने उससे उसका हाथ मांग लिया…
मैंने तुम्हें औरतों से बतियाते कभीं नहीं देखाऔर न ही मर्दों से ऐसा सुना- ‘किसी औरत नेबड़ी अदब से तुम्हारा…
एक बाग़ हैअनुभव काउसमें खिले हैं कुछ फूलये फूल बरसों का निदाघझेल कर बड़े हुएये फूल समय के शेष नाम…
क्यों?खो गए हो विकल्प में,चर्चित स्वल्प मेंविस्मृत सुमधुर अतीतक्यों लेकर चलते होबेगाना गीतस्वर्ग की ईच्छा क्योंछोड़ दी तुमनेआख़िर अनसुलझी, अस्तित्वविहीनअनगिनत…
बहुत पहले जब अपने को तलाश रहा था एक कविता लिखी थी- कुछ रूमानी- कसक और घबराहट की कविता। शब्द…