एक दिन ब्रह्मा मिल जाते…
एक दिन ब्रह्मा मिल जाते तो उनसे पूछता कुछ प्रश्न और अपनी जिज्ञासा शांत करता कि क्यों नहीं पहुंचती उन…
एक दिन ब्रह्मा मिल जाते तो उनसे पूछता कुछ प्रश्न और अपनी जिज्ञासा शांत करता कि क्यों नहीं पहुंचती उन…
स्वीकार कर लिया काँटों के पथ को पहचाना फ़िर भी जकड़ लिया बहुरूपी झूठे सच को कुछ बतलाओ, न रखो…
नये वर्ष के आगमन पर बहुत कुछ संजोया है मन में। सम्भव है नए साज बनें हृदय के अनगिन स्नेहिल…
फ़ैली हुई विश्वंजली में, प्रेम की बस भीख दे दो विरह बोझिल अंत को स्नेहिल मिलन की सीख दे दो।…
बज गयी दुन्दुभि, परिवर्तन आने वाला है। है निस्सीम अगाध अकल्पित, समय शून्य का यह विस्तार प्रिय देखो वह चपल…
क्यों न मेरा यह हृदय मूक-सा रहने दिया? क्या करुँ उस अग्नि का निशि-दिन जले जो इस हृदय में क्या…