कहाँ हो मेरे मन के स्वामी आओ
कहाँ हो मेरे मन के स्वामी आओ, मैं हूँ एक अकिंचन जग में प्रेम-सुधा बरसाओ। आज खड़ा है द्वार तुम्हारे…
कहाँ हो मेरे मन के स्वामी आओ, मैं हूँ एक अकिंचन जग में प्रेम-सुधा बरसाओ। आज खड़ा है द्वार तुम्हारे…
अभी-अभी पूजा उपाध्याय जी के ब्लॉग से लौट रहा हूँ। एक कविता पढ़ी- माँ के लिए लिखी गयी। मन सम्मोहित…
Water dream (Photo credit: @Doug88888) मैं हुआ स्वप्न का दास मुझे सपने दिखला दो प्यारे। बस सपनों की है आस…
कहाँ भूल गया जीवन का राग, मेरे साथी सलोने । क्यों रूठ गया अपना यह भाग, मेरे साथी सलोने। कैसे…
दर्द सहता रहा उसे, सहता है अब तलक। दर्द ने अपनी हस्ती भर उसे चाहा उसकी शिराओं, मांसपेशियों से होते-…
एक कागज़ तुम्हारे दस्तख़त का मैंने चुरा लिया था, मैंने देखा कि उस दस्तख़त में तुम्हारा पूरा अक्स है। दस्तख़त…