रवीश कुमार के ‘क़स्बा’ की चर्चा: क़स्बा की प्रविष्टियों का सन्दर्भ
मैं रवीश कुमार के कस्बे (क़स्बा- रवीश कुमार का ब्लॉग) का ज़िक्र करना चाहता हूँ। यह कस्बा भी मेरे कस्बे…
मैं रवीश कुमार के कस्बे (क़स्बा- रवीश कुमार का ब्लॉग) का ज़िक्र करना चाहता हूँ। यह कस्बा भी मेरे कस्बे…
राजकीय कन्या महाविद्यालय के ठीक सामनेसंघर्ष अपनी चरमावस्था में है,विद्रूप शब्दों से विभूषित जिह्वा सत्वर श्रम को तत्पर है,कमर की…
The poem “He came and sat by my side but I woke not” is a beautiful and evocative piece by…
पिस-पिस कर भर्ता हुए समय के कोल्हू मेंतुम समायातीत बनो तो मर्द बखानूँ मैं। जाने कितने घर-घर के तुम व्यवहार…
तुम्हें नहीं पताकितनी देर सेतुम्हारी राह देख रहा हूँ। तुमने कहा था आने के लिएअंतरतम में अनुरागी दीप जलाने के…
प्रेम में केवल दो अस्तित्व नहीं मिलते, बल्कि स्वयं से साक्षात्कार और रूपांतरण की एक आध्यात्मिक यात्रा भी प्रारंभ होती…