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भिक्षुक : नख-शिख वर्णन (हिन्दी कविता)

By Himanshu Pandey

कुछ दिनों पहले एक भिक्षुक ने दरवाजे पर आवाज दी। निराला का कवि मन स्मृत हो उठा। वैसी करुणा का…

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एक आदमी, एक गुरु- हाँ, हाँ, ना,ना

By Himanshu Pandey

मैंने तुम्हें औरतों से बतियाते कभीं नहीं देखाऔर न ही मर्दों से ऐसा सुना- ‘किसी औरत नेबड़ी अदब से तुम्हारा…

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