Poetic Adaptation

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नहीं, प्रेम है कार्य नहीं

By Himanshu Pandey

प्रेमिका ने कहा था-“प्यार करते हो मुझसे?” प्रेमी ने कहा-“प्यार करने की वस्तु नहीं। मैं प्यार ’करता’ नहीं, ’प्यार-पूरा’ बन…

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अपने प्रेम-सरित को मेरे हृदय जगत पर बह जाने दो

By Himanshu Pandey

प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद: पाँच Capture of Love Letters अब तक जो मैं हठ करती थी, हर इन्सान अकेला…

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जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं

By Himanshu Pandey

आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन…

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