Capsule Poetry

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प्यार और मुक्त हृदय

By Himanshu Pandey

वह तुम्हारामुक्त हृदय थाजिसने मुझे प्यार काविश्वास दिया,मैं तुम्हें प्यार करने लगा। मैं तुम्हें प्यार करता थाअपनी समस्त जड़ता सेऊपर…

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