Ramyantar

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मैं कैसे प्रेमाभिव्यक्ति की राह चलूँ .

By Himanshu Pandey

तुम आयेविगत रात्रि के स्वप्नों में श्वांसों की मर्यादा के बंधन टूट गयेअन्तर में चांदनी उतर आयीजल उठी अवगुण्ठन में…

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दोनों हाँथ जोड़कर…

मैं अपनी कवितायेंतुम्हें अर्पित करता हूँजानता हूँकि इनमें खुशियाँ हैंऔर प्रेरणाएँ भीजो यूँ तो सहम जाती हैंघृणा और ईर्ष्या के…

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तू सदा ही बंधनों में व्यक्त है, अभिव्यक्त है

व्यथित मत होकि तू किसी के बंधनों में है, अगर तू है हवातू सुगंधित है सुमन के सम्पुटों में बंद…

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