Ramyantar

118   Articles in this Category
Explore
13

मैं कैसे प्रेमाभिव्यक्ति की राह चलूँ .

By Himanshu Pandey

तुम आयेविगत रात्रि के स्वप्नों में श्वांसों की मर्यादा के बंधन टूट गयेअन्तर में चांदनी उतर आयीजल उठी अवगुण्ठन में…

23

दोनों हाँथ जोड़कर…

मैं अपनी कवितायेंतुम्हें अर्पित करता हूँजानता हूँकि इनमें खुशियाँ हैंऔर प्रेरणाएँ भीजो यूँ तो सहम जाती हैंघृणा और ईर्ष्या के…

25

तू सदा ही बंधनों में व्यक्त है, अभिव्यक्त है

व्यथित मत होकि तू किसी के बंधनों में है, अगर तू है हवातू सुगंधित है सुमन के सम्पुटों में बंद…

Exit mobile version