पूर्व और पश्चिम की संधि पर खड़े युगपुरुष ! तुम सदैव भविष्योन्मुख हो, मनुष्यत्व की सार्थकता के प्रतीक पुरुष हो, तुम घोषणा हो मनुष्य के भीतर छिपे देवत्व के और तुम राष्ट्र की भाव-प्रसारिणी प्रवृत्तियों का विस्तरण हो । अहिंसा…