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तुम्हीं मिलो, रंग दूँ तुमको, मन जाए मेरा फागुन

Man Jaye Mera FAgun

जग चाहे किसी महल में अपने वैभव पर इतराएया फिर कोई स्वयं सिद्ध बन अपनी अपनी गाएमौन खड़ी सुषमा निर्झर की बिखराये मादक रुन-झुनतुम्हीं मिलो, रंग दूँ तुमको, मन जाए मेरा फागुन।  यूँ तो ऋतु वसन्त में खग-कुल अनगिन राग…

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भारती तेरी जय हो (सरस्वती वंदना)

तेरी सुरभि वहन कर लायी शीतल मलय बयार,भारती तेरी जय हो!तेरी स्मृति झंकृत कर जाती उर वीणा के तारभारती तेरी जय हो! अरुणोदय में सुन हंसासिनी तव पदचाप विहंगथिरक थिरक गा रहा प्रभाती पुलकित सारा अंगतेरे स्वागत में खिल जाती…

Poetry, Ramyantar

कविता : आशा

सुहृद! मत देखो- मेरी शिथिल मंद गति, खारा पानी आँखों का मेरे, देखो- अन्तर प्रवहित उद्दाम सिन्धु की धार और हिय-गह्वर का मधु प्यार। मीत! मत उलझो- यह जो उर का पत्र पीत इसमें ही विलसित नव वसंत अभिलषित और…

Capsule Poetry, Ramyantar

कविता: बादल तुम आना

विलस रहा भर व्योम सोम मन तड़प रहा यह देख चांदनी विरह अश्रु छुप जाँय, छुपाना बादल तुम आना ।। 1 ।। झुलस रहा तृण-पात और कुम्हलाया-सा मृदु गात धरा दग्ध, संतप्त हृदय की तृषा बुझाना बादल तुम आना।। 2…

Capsule Poetry, Poetry, Ramyantar

कविता : इंतज़ार उसका था

[एक.] सलीका आ भी जाता सिसक उठता झाड़ कर धूल पन्नों की पढ़ता कुछ शब्द सुभाषित ढूंढ़ता झंकारता उर-तार राग सुवास गाता रहस-वन मन विचरता। मैं स्वयं पर रीझ तो जाता पर इंतज़ार उसका था। [दो.] साँवली-सी डायरी में एक…

Ramyantar, Songs and Ghazals

ग़ज़ल – चाँदनी या मुख़्तसर सी धूप लाना, भूलना मत

नज़र में भरकर नज़र कुछ सिमट जाना, भूलना मत। देखना होकर मगन फिर चौंक जाना, भूलना मत। मौज़ खोकर ज़िन्दगी ग़र आ किनारों में फँसे नाव अपनी खींचकर मझधार लाना, भूलना मत। न पाया ढूढ़कर भी दर्द दिल ने बेखबर…

Capsule Poetry, Ramyantar

मेरे प्यारे मज़दूर

मैं जानता हूँ तुम्हारे भीतर कोई ’क्रान्ति’ नहीं पनपती पर बीज बोना तुम्हारा स्वभाव है। हाथ में कोई ‘मशाल’ नहीं है तुम्हारे पर तुम्हारे श्रम-ज्वाल से भासित है हर दिशा। मेरे प्यारे ’मज़दूर’! यह तुम हो जो धरती की गहरी…

Literary Classics, Poetry, Ramyantar, Translated Works

सुबह की प्रार्थना : निस्सीम ईजीकेल

जितना मेरा अध्ययन है उसमें भारतीय अंग्रेजी लेखकों में निस्सीम ईजीकेल का लेखन मुझे अत्यधिक प्रिय है। ईजीकेल स्वातंत्र्योत्तर भारतीय अंग्रेजी कविता के पिता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आधुनिक भारतीय अंग्रेजी काव्य में विशिष्ट स्थान प्राप्त ईजीकेल सहज कविता,…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

जिन्दगी ज़हीन हो गयी..

जिन्दगी ज़हीन हो गयी मृत्यु अर्थहीन हो गयी । रूप बिंध गया अरूप-सा सृष्टि दृश्यहीन हो गयी । भाव का अभाव घुल गया भावना तल्लीन हो गयी । टूट गयी सहज बाँसुरी व्यथा तलफत मीन हो गयी । बाँध लूँ…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

मैं सहजता की सुरीली बाँसुरी हूँ…

मैं सहजता की सुरीली बाँसुरी हूँ घनी दुश्वारियाँ हमको बजा लें । मैं अनोखी टीस हूँ अनुभूति की कहो पाषाण से हमको सजा लें । मैं झिझक हूँ, हास हूँ, मनुहार हूँ प्रणय के राग में इनका मजा लें ।…