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  • डायोजिनीज़ (Diogenes) का एक प्रेरक प्रसंग

    Greek Philosopher Diogenes

    डायोजिनीज़ (Diogenes) के जीवन से जुड़ा यह प्रेरक प्रसंग शान्तचित्त रहने के अभ्यास को रेखांकित करता है। मनुष्य का स्वभाव है, प्रत्येक परिस्थिति एवं कार्य के प्रति अपनी धारणा बनाना। अभाव में भी स्वभाव न छूटता है। विपन्नता में भी >>

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‘आशावाद परो भव’। अंधेरे में फ़ंस कर कीमती जिन्दगी को बर्बाद करना बड़ी मूर्खता है। अँधेरा एक रात का मेहमान होता है। फ़िर चमकता सवेरा हाजिर हो जाता है। पतझर के बाद बसंत आता ही है। इसलिये बसंत के पाँवों की आहट जरूर सुननी चाहिये। हमारा अधैर्य हमारी परेशानी है। निराशा का कुहासा फ़टेगा। सूर्य पीछे ही तो बैठा है।