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  • प्रेम प्रलाप

    प्रेम प्रलाप

    मेरे प्रिय! हर घड़ी अकेला होना शायद बेहतर विकल्प है तुम्हारी दृष्टि में। मैं वह विकल्प नहीं बन सका जो  बनना चाहता था। मुझे मेरी अतिशय भावनाओं ने मारा, मेरे सारे बेहतर काम दब गये मेरी भावनाओं के प्रकटीकरण में।… >>

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‘आशावाद परो भव’। अंधेरे में फ़ंस कर कीमती जिन्दगी को बर्बाद करना बड़ी मूर्खता है। अँधेरा एक रात का मेहमान होता है। फ़िर चमकता सवेरा हाजिर हो जाता है। पतझर के बाद बसंत आता ही है। इसलिये बसंत के पाँवों की आहट जरूर सुननी चाहिये। हमारा अधैर्य हमारी परेशानी है। निराशा का कुहासा फ़टेगा। सूर्य पीछे ही तो बैठा है।