Ramyantar

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जहाँ रुका है मन आँखें भी रुक रह जातीं

By Himanshu Pandey

आँखें अपरिसीम हैं, संसृति का आधार है बिना दृष्टि का सृष्टि निवासी निराधार। ऑंखें बोती हैं देह-भूमि पर प्रेम-बीज इन…

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