Category

Translated Works

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी – 21

स्वदेहोद्भूताभिर्घृणिभिरणिमाद्याभिरभितो, निषेवे नित्ये त्वामहमिति सदा भावयति यः। किमाश्चर्यं तस्य त्रिनयनसमृद्धिं तृणयतो, महासंवर्ताग्निविरचयति नीराजनविधिं ॥95॥ स्वशरीरोद्भूत किरणसमूह अणिमादिक सुसेवित जो स्वरूप त्वदीय नित करता निषेवित अहं भावित कौन सा आश्चर्य शंभुसमृद्धि वह साधकशिरोमणि तृणसदृश गिनता प्रलय का प्रज्ज्वलित पावक दहन भी…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी – 20

नखैर्नाकस्त्रीणां करकमलसङ्कोचशशिभिः तरूणां दिव्यानां हसत इव ते चण्डि चरणौ। फलानि स्वःस्थेभ्यः किसलय-कराग्रेण ददतां दरिद्रेभ्यो भद्रां श्रियमनिशमह्नाय ददतौ ॥88॥ पद तुम्हारे निज सुधाकर नख अवलि से स्वर्गललना के सरोरुह पाणितल को संकुचित देते बना हैं चण्डि! तेरे चरणद्वय देवेन्द्रवन स्थित कल्पतरु…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 81-87)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्य रूपांतर करीन्द्राणां शुण्डान् कनककदलीकाण्डपटली-मुभाभ्यामूरुभ्यामुभयमपि निर्जित्य भवति।सुवृत्ताभ्यां पत्युः प्रणतिकठिनाभ्यां गिरिसुतेविधिज्ञे जानुभ्यां विबुधकरिकुम्भद्वयमसि॥81॥करिवरों के शुण्ड कोकंचन कदलि के खंभ द्वय कोकर दिया करतीं पराजित युगल जंघायें तुम्हारीजानुजो पति को प्रणति करतेसुवृत्त हुए कठिन हैंजीतती उनसेविवुध करि कुम्भ द्वयहे…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 76-80)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्य रूपांतर यदेतत्कालिन्दी तनुतरतरंगाकृति शिवेकृशे मध्ये किंचिज्जननि तव यद्भाति सुधियाम्विमर्दादन्योन्यं कुचकलशयोरन्तरगतं तनूभूतं व्योम प्रविशदिव नाभिं कुहरिणीम्॥76॥ यमुन लहरी सदृश नीलीसूक्ष्म अति तनु वस्तु कोईप्रान्त कृश तव मध्य मेंप्रतिभात होती सुधि जनों कोकुच कलश के बीच में पिसता…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 71-75)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद समं देवि स्कन्दद्विपवदनपीतं स्तनयुगं तवेदं नः खेदं हरतु सततं प्रस्नुतमुखम्।यदालोक्याशंकाकुलितहृदयो हासजनकःस्वकुम्भौ हेरम्बः परिमृशति हस्तेन झटिति॥71॥ संग हीयुग तनयषडमुख गजवदनपय स्रवित तेरे कुच युगल का पान करतेजान जिनको भाल ही निजगणाधिप शंकितस्वशिर परफेर अपना शुण्डतुमको हैं बना…

Poetic Adaptation, Ramyantar, Translated Works, सौन्दर्य-लहरी

सौन्दर्य लहरी (छन्द संख्या 66-70)

सौन्दर्य लहरी का हिन्दी काव्यानुवाद कराग्रेण स्पृष्टं तुहिनगिरिणा वत्सलतयागिरीशेनोदस्तं मुहुरधरपानाकुलतया करग्राह्यं शंभोर्मुखमुकुरवृन्तं गिरिसुते कथंकारं ब्रूमस्तव चुबुकमौपम्यरहितम्॥66॥ पाणि सेवात्सल्यवशजिसको दुलारा हिमशिखर नेअधरपानाकुलितजिसकोकिया स्पर्शित चन्द्रधर नेमुख मुकुर के वृन्त समपकड़ा जिसे सविलास शिव नेकौन वर्णन कर सकेगाउस अमोलकचिबुक का फिरसत्य ही हैं ललित अनुपमचिबुक…

Gitanjali by Tagore, Ramyantar, Tagore's Poetry, Translated Works

जाग जाये यह मेरा देश (गीतांजलि का भावानुवाद)

यह देश अपूर्व, अद्भुत क्षमताओं का आगार है। यहाँ जो है, कहीं नहीं है, किन्तु यहाँ जो होता दिख रहा है वह भी कहीं नहीं है। इस देश की अनिर्वच प्रज्ञा और अद्वितीय पौरुष को विस्मरण ने आकंठ आवृत कर…