Tag

सत्यवान

Ramyantar, नाटक, नाट्य

सावित्री-6

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3, सावित्री-4 एवं सावित्री-5 से आगे…… पंचम दृश्य (जंगल का दृश्य। सत्यवान के हाथ में कुल्हाड़ी, कन्धे पर गमछा, सावित्री के हाथ में टोकरी और पानी का बर्तन) चित्र:अर्द्धेन्दु बनर्जी;स्रोत:Kamat’s Potpourri सत्यवान: सुखदायिनी! टोकरियों में पहले फल भर लिया…

Ramyantar, नाटक, नाट्य

सावित्री-5

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3 एवं सावित्री-4 से आगे…… चतुर्थ दृश्य (महाराजा द्युमत्सेन की पवित्र स्थलीय आश्रम जैसी व्यवस्था। सावित्री पति के साथ सुख पूर्वक निवास करती है। आभूषण उतार कर रख देती है और गैरिक वसना हो जाती है। पति सास-ससुर की सेवा कर…

Ramyantar, नाटक, नाट्य

सावित्री-4

सावित्री-1, सावित्री-2 एवं सावित्री-3 से आगे…… तृतीय दृश्य (महाराजा अश्वपति का राजदरबार। बन्दी विरद गान कर रहे हैं। आमोद-प्रमोद का हृदय हारी दृश्य। देवर्षि नारद का प्रवेश।) नारद: नारायण! नारायण! महाराजा: देवर्षि के चरणों में राजदरबार सहित अश्वपति का प्रणाम…

Ramyantar, नाटक, नाट्य

सावित्री-3

सावित्री-1 एवं सावित्री-2 से आगे…… सावित्री: गुरुदेव! यहीं सरिता तट पर रुक जायें। यहाँ जो जहाँ है सत्य को समर्पित है। सब चिर परिचित सा लग रहा है। ये फूल, यह लहराता वृक्ष, ये सूखी वन की लकड़ियाँ, यह नदी…

Ramyantar, नाटक, नाट्य

सावित्री-2

  सावित्री-1 से आगे…. द्वितीय दृश्य  (वन प्रान्तर का दृश्य। पक्षियों का मधुर संगीत गुंजायमान है। दूर मन्दिरों की घंटियाँ एवं शंख-ध्वनि सुनायी पड़ रही है।) सावित्री: (भ्रमण करते हुए) देखो प्रातःकालीन बेला समुपस्थित है। प्रभात का ग्वाल-बाल उदयाचल से…

Ramyantar, नाटक, नाट्य

सावित्री

इस ब्लॉग की नाट्य प्रस्तुतियाँ करुणावतार बुद्ध (1,2,3,4,5,6,7,8,9,10) एवं सत्य हरिश्चन्द्र (1,2,3,4,5,6,7,8,9) उन प्रेरक चरित्रों के पुनः पुनः स्मरण का प्रयास हैं जिनसे मानवता सज्जित व गौरवान्वित होती है। ऐसे अन्याय चरित्र हमारे गौरवशाली अतीत की थाती हैं और हमें अपना वह…