’महाजनो येन गतः..’ वाला मार्ग भरी भीड़ वाला मार्ग है नहीं रुचता मुझे, जानता हूँ  यह रीति-लीक-पिटवइयों की निगाह में  निषिद्ध है, अशुद्ध है । चिन्ता क्या !  मेरी इस रुचि में (या अरुचि में) बाह्य और आभ्यन्तर, प्रेरणा और…