जग चाहे किसी महल में अपने वैभव पर इतराएया फिर कोई स्वयं सिद्ध बन अपनी अपनी गाएमौन…
भारतीय संस्कृति में होली मात्र रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं, उल्लास और भक्ति के मेल का…
होली में कुछ मेरी भी सुनमन, मत अपने में ही जल भुन। जब शोभित नर्तित त्वरित सरित…
मुझे वहीं ले चलो मदिर मन जहाँ दीवानों की मस्त टोली होली, होली, होली। कभी भंग मे, कभी…
फागुन का महीना आते ही हवा में जैसे अनदेखा रंग घुल जाता है – आँगन, मन और…
आचारज जी का आह्वान सुन लपके ही थे कि तिमिरान्ध हो गये (यूँ फगुनान्ध होने को बुलाये…