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Hindi Poets

Poetry, Ramyantar

माँ: नौ कवितायें

कुछ दिनों पहले चिट्ठा चर्चा में कविता जी ने ’माँ’ पर लिखी कविताओं की भावपूर्ण चर्चा की थी। तब से ही मन में इसी प्रकार की कुछ कविताओं की पंक्तियाँ बार-बार स्मरण में आ रहीं थीं। बहुत याद करने पर,…

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पत्रगीति और निराला की कविता शिवाजी का पत्र

छायावादी कवियों की नवीन चेतना के प्रसार के परिणामस्वरूप छायावादी रूढ़ि विद्रोही नवीन युग बोध ने इन्हें समस्त रूढ़ि बन्धनों का तिरस्कार कर अपने भावों के संप्रेषण के लिये तथा विचारों के अनुकूल भिन्न-भिन्न प्रकार की नयी काव्य-विधाओं की रचना…

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किस-किसका दूर करूँगा मैं, संदेह यहाँ जन-जन के (‘बच्चन’ के जन्म दिवस पर)

मधुशाला व बच्चन पर फतवे की आंच अभी धीमी नहीं पड़ी होगी। ‘बच्चन’ होते तो ऐसे फतवों के लिए कह डालते – “मैं देख चुका जा मस्जिद में झुक-झुक मोमिन पढ़ते नमाज, पर अपनी इस मधुशाला में पीता दीवानों का…