पिताजी की संग्रहित की हुई अनेकों किताबों में एक है ‘कहानी कैसे बनी’। उसे महीनों पहले पढ़ना शुरु किया था। कुल आठ कहानियों की यह किताब मुझे अविश्वसनीय रचनाधर्मिता का उदाहरण लगी। मैंने इसे पूरा का पूरा पढ़ तो लिया…