वाराणसी के शासक ब्रह्मदत्त को अपने दोषों के संबंध में जानने की इच्छा थी । उसने राजभवन के सेवकों से लेकर जनपद की प्रजा तक सब से प्रश्न किये ; किन्तु किसी को उसमें कोई त्रुटि नहीं दिखी । निराश…