जग चाहे किसी महल में अपने वैभव पर इतराएया फिर कोई स्वयं सिद्ध बन अपनी अपनी गाएमौन…
होली में कुछ मेरी भी सुनमन, मत अपने में ही जल भुन। जब शोभित नर्तित त्वरित सरित…
मुझे वहीं ले चलो मदिर मन जहाँ दीवानों की मस्त टोली होली, होली, होली। कभी भंग मे, कभी…
बिहारी फाग-रंग चढ़ गया है इन दिनों सब पर ! नदा कर चुप बैठा हूँ, ये ओरहन…
घनानंद (राग केदारौ) फाग-रंग चढ़ गया है इन दिनों सब पर ! नदा कर चुप बैठा हूँ,…
फागुन का महीना आते ही हवा में जैसे अनदेखा रंग घुल जाता है – आँगन, मन और…
