सच्चा शरणम्
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पिया संग खेलब होरी…


सखि ऊ दिन अब कब अइहैं,
पिया संग खेलब होरी ।

बिसरत नाहिं सखी मन बसिया
केसर घोरि कमोरी ।
हेरि हिये मारी पिचकारी
मली कपोलन रोरी ।
पीत मुख अरुन भयो री –
पिया संग खेलब होरी ।

अलक लाल भइ पलक लाल भइ
तन-मन लाल भयो री ।
चुनरी सेज सबै अरु नारी
लाल ही लाल छयौ री ।
आन कोउ रंग न रह्यौ री –
पिया संग खेलब होरी ।

भ्रमित भई तब भरि अँकवरिया
धरि अँगुरिन की पोरी ।
पंकिल गुन-गुन गावन लागे
प्रेम सुधा-रस बोरी ।
अचल सुख उदय भयो री –
पिया संग खेलब होरी । 

–प्रेम नारायण ’पंकिल’

13 comments

  1. भ्रमित भई तब भरि अँकवरिया
    धरि अँगुरिन की पोरी ।

    ख़ूब गुनगुनाने वाला गीत है ..

  2. बहुत खूबसूरत होरी के रंग ….सुन्दर..

  3. फागुनी रंग में सराबोर करती हुई एक सुन्दर रचना को हमसे बांटने के लिए आभार!
    सादर

  4. सारा वातावरण ही होलीमय हो गया !!! …और प्रेममय भी.

  5. बहुत सुन्दर प्रेम नारायण जी को बधाई

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