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Babuji

audio, Devotional, Ramyantar, लोक साहित्य

कब सुधिया लेइहैं मन के मीत

सहज, सरल, सरस भजन। बाबूजी की भावपूर्ण लेखनी के अनेकों मनकों में एक। छुटपन-से ही सुलाते वक़्त बाबूजी अनेकों स्वरचित भजन गाते और सुलाते। लगभग सभी रचनायें अम्मा को भी याद होतीं और उनका स्वर भी हमारी नींद का साक्षी…

Poetry, Ramyantar, Verse

दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते

 Flowers (Photo credit: soul-nectar) कविता: प्रेम नारायण ’पंकिल’ जो बोया वही तो फसल काटनी है दिया लिख अमा पूर्णिमा लिखते-लिखते। पथिक पूर्व का था चला किन्तु पश्चिम दिया राहु लिख चन्द्रमा लिखते-लिखते। रहा रात का ही घटाटोप बाँधेन बाहर निकलकर…