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Holi

Poetry, Verse

तुम्हीं मिलो, रंग दूँ तुमको, मन जाए मेरा फागुन

Man Jaye Mera FAgun

जग चाहे किसी महल में अपने वैभव पर इतराएया फिर कोई स्वयं सिद्ध बन अपनी अपनी गाएमौन खड़ी सुषमा निर्झर की बिखराये मादक रुन-झुनतुम्हीं मिलो, रंग दूँ तुमको, मन जाए मेरा फागुन।  यूँ तो ऋतु वसन्त में खग-कुल अनगिन राग…

Ramyantar

को सजनी निलजी न भई, अरु कौन भटू जिहिं मान बच्यौ है

१. (राग केदार) पकरि बस कीने री नँदलाल। काजर दियौ खिलार राधिका, मुख सों मसलि गुलाल॥ चपल चलन कों अति ही अरबर, छूटि न सके प्रेम के जाल। सूधे किए अंक ब्रजमोहन, आनँदघन रस-ख्याल॥ २. (राग सोरठ) मनमोहन खेलत फाग…

Ramyantar

होली में कुछ मेरी भी सुन!

होली में कुछ मेरी भी सुन। मन, मत अपने में ही जल भुन ।। जब शोभित नर्तित त्वरित सरित पर वासंती चन्द्रिका धवल। विचरता पृष्ठ पर पोत पीत श्यामल अलि मृदुल मुकुल परिमल। कामिनी-केलि-कान्तार-क्वणित तुम कंकण किंकिणि नूपुर सुन ।…

Ramyantar

होली, होली, होली

मुझे वहीं ले चलो मदिर मन जहाँ दिवानों की मस्त टोली  होली, होली, होली। कभी भंग मे, कभी रंग में, कभीं फूल से खिले अंग में कभी राग में, कभी फाग में, कभीं लचक उठती उमंग में पीला कोई गाल…

Poetry, Ramyantar, Verse

बनारस की होली बनारस की बोली में

अब का पूछ्त हउआ हमसे कि होली का होला। कइसे तोंहके हाल बताई कवन तरीके से समझाई कइसन बखत रहल हऽ ऊ भी कवने भाषा में बतलाई, उछरत रहल बांस भर मनवां जमत रहल जब गोला। छैल चिकनियां छटकत रहलन…