मैं अपनी कवितायेंतुम्हें अर्पित करता हूँजानता हूँकि इनमें खुशियाँ हैंऔर प्रेरणाएँ भीजो यूँ तो सहम जाती हैंघृणा और ईर्ष्या के चक्रव्यूह सेपर, नियति इनमें भी भर देती हैनित्य का संगीत । यह कवितायें तुम्हारे लियेइसलियेकि यह कर्म और कारण की…