“एक ज्योति सौं जरैं प्रकासैंकोटि दिया लख बाती।जिनके हिया नेह बिनु सूखेतिनकी सुलगैं छाती।बुद्धि को सुअना मरमु…
वसंत का चरण न्यास हुआ है। गज़ब है। आया तो आ ही गया। “फूली सरसों ने दिया…
विकल हूँ, पहचान लूँ मैं कौन-सी वह पीर है ! अभीं आया नहीं होता वसन्त तभीं उजाड़…
