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January 2013

Ramyantar

अविरल गति: वीना की कविता

Chandraparbha River flow: Naugarh-Chandauli एक नदी अविरल गति से बहती जा रही थी इठलाती हुई, बलखाती हुई कुछ कहती जा रही थी सबको मोह रही थी कल-कल पायल की झनकार से खुश थी बहुत, न था उसे कोई कष्ट इस…

Ramyantar, नाटक

सावित्री-6

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3, सावित्री-4 एवं सावित्री-5 से आगे…… पंचम दृश्य (जंगल का दृश्य। सत्यवान के हाथ में कुल्हाड़ी, कन्धे पर गमछा, सावित्री के हाथ में टोकरी और पानी का बर्तन) चित्र:अर्द्धेन्दु बनर्जी;स्रोत:Kamat’s Potpourri सत्यवान: सुखदायिनी! टोकरियों में पहले फल भर लिया…

Ramyantar, नाटक

सावित्री-5

सावित्री-1, सावित्री-2, सावित्री-3 एवं सावित्री-4 से आगे…… चतुर्थ दृश्य (महाराजा द्युमत्सेन की पवित्र स्थलीय आश्रम जैसी व्यवस्था। सावित्री पति के साथ सुख पूर्वक निवास करती है। आभूषण उतार कर रख देती है और गैरिक वसना हो जाती है। पति सास-ससुर की सेवा कर…