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माँ की गोद ही चैत्र की नवरात्रि है ..

एक ज्योति सौं जरैं प्रकासैं कोटि दिया लख बाती। जिनके हिया नेह बिनु सूखे तिनकी सुलगैं छाती। बुद्धि को सुअना मरमु न जानै कथै प्रीति की मैना। दिपै दूधिया ज्योति प्रकासैं घर देहरी अँगन। नवेली बारि धरैं दियना॥ —(आत्म प्रकाश…

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गहगह वसंत

वसंत का चरण न्यास हुआ है। गज़ब है। आया तो आ ही गया। “फूली सरसों ने दिया रंग। मधु लेकर आ पहुँचा अनंग। वधु वसुधा पुलकित अंग-अंग….”। मतवाली कोयल की कूक से भरा, सिन्धुबार, कुन्द और सहकार से सुशोभित, गर्वीले…

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शील और अनुशासन

फेसबुक सबके लिए बहुत अनुकूल है, पर मुझे सुहाता नहीं! इतनी रफ्तार का आदी मैं नहीं! चीजें बहुत तेज गुम होती जाती हैं वहाँ। कितने लिंक, कितने थ्रेड सहेजूँ? खैर, वहाँ एक प्रश्न दिखा, उत्तर वहाँ दे सकूँ, यह कौशल…

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आया है प्रिय ऋतुराज …

“वसंत एक दूत है विराम जानता नहीं, संदेश प्राण के सुना गया किसे पता नहीं । पिकी पुकारती रही पुकारते धरा गगन, मगर कभी रुके नहीं वसंत के चपल चरण ।” वसंत प्रकृति का एक अनोखा उपहार है । आधी…

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छ्ठ पूजा : परम्परा एवं सन्दर्भ

हमारी परम्परा में विभिन्न ईश्वरीय रूपों की उपासना के लिए अलग-अलग दिन-तिथियों का निर्धारण है । जैसे गणेश पूजा के लिए चतुर्थी, विष्णु-पूजा के लिए एकादशी आदि। इसी प्रकार सूर्य के लिए सप्तमी तिथि की संगति है, जैसे सूर्य-सप्तमी, अचला…

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के० शिवराम कारंत : ’मूकज्जी’ का मुखर सर्जक

           ’के० शिवराम कारंत’ – भारतीय भाषा साहित्य का एक उल्लेखनीय नाम, कन्नड़ साहित्य की समर्थ साहित्यिक विभूति, बहुआयामी रचना-कर्म के उदाहरण-पुरुष !  सर्जना में सत्य और सौन्दर्य के प्रबल जिज्ञासु कारंत जीवन को सम्पूर्णता और यथार्थता में निरखने की…

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समय और शब्द के कवि सीताकान्त महापात्र

यथार्थ और अनुभूति के विरल सम्मिश्रण से निर्मित कविता के कवि डॉ० सीताकांत महापात्र का जन्मदिवस है आज  । हिन्दी जगत में भली भाँति परिचित अन्य भाषाओं के कवियों में उड़िया के इस महत्वपूर्ण हस्ताक्षर का स्थान अप्रतिम है ।…

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हिन्दी दिवस पर ’क्वचिदन्यतोऽपि”

हिन्दी दिवस की शुभकामनाओं सहित क्वचिदन्यतोऽपि पर की गयी टिप्पणी प्रसंगात यहाँ प्रस्तुत कर दे रहा हूँ –  “देर से देख रहा हूँ, पर हिन्दी दिवस के दिन देख रहा हूँ – संतोष है । इसका कुछ निहितार्थ भी जाने…

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हजारी प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं में मानवीय संवेदना (जन्मदिवस – १९ अगस्त पर विशेष )

हजारी प्रसाद द्विवेदी (फोटो : वेबदुनिया से साभार ) ऋग्वेद में वर्णन आया है : ‘शिक्षा पथस्य गातुवित’, मार्ग जानने वाले , मार्ग ढूढ़ने वाले और मार्ग दिखाने वाले, ऐसे तीन प्रकार के लोग होते हैं। साहित्यिकों की गणना इस…

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यह हँसी कितनी पुरानी है ?

हँसते हुए यह कभी नहीं सोचा था, कि यह हँसी कितनी पुरानी है और किसका अनुकरण कर मानव की हँसी की प्रवृत्ति विकसित हुई होगी?  खींसे निपोरकर, दाँत दिखाते हुए हँसना, खिलखिलाते हुए तोंद हिलाते हुए हँसना, आवाज निकालते चिल्लाते…