बादल

विलस रहा भर व्योम
सोम
मन तड़प रहा
यह देख चांदनी
विरह अश्रु छुप जाँय, छुपाना
बादल तुम आना ।। 1 ।।

झुलस रहा तृण-पात
और कुम्हलाया-सा
मृदु गात
धरा दग्ध,
संतप्त हृदय की तृषा बुझाना
बादल तुम आना।। 2 ।।