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नमन् अनिर्वच ! ( गांधी जयंती पर विशेष )

Gandhi_Jayanti

पूर्व और पश्चिम की संधि पर खड़े युगपुरुष ! तुम सदैव भविष्योन्मुख हो, मनुष्यत्व की सार्थकता के प्रतीक पुरुष हो, तुम घोषणा हो मनुष्य के भीतर छिपे देवत्व के और तुम राष्ट्र की भाव-प्रसारिणी प्रवृत्तियों का विस्तरण हो । अहिंसा…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

बस आँख भर निहारो मसलो नहीं सुमन को

बस आँख भर निहारो मसलो नहीं सुमन कोसंगी बना न लेना बरसात के पवन को । वह ही तो है तुम्हारा उसके तो तुम नहीं होबेचैन कर रहा क्यों समझा दो अपने मन को । न नदी में बाँध बाँधो…

Poetry, Ramyantar

एक पेड़ चाँदनी लगाया है आँगने

बचपन से देवेन्द्र कुमार के इस गीत को गाता-गुनगुनाता आ रहा हूँ, तब से जब ऐसे ही कुछ गीत-कवितायें गाकर विद्यालय के पुरस्कार झटकने का उत्साह रहा करता था। आज बुखार में तपता रहा सारे दिन। कई बार बोझिल मन…

Hindi Ghazal, Ramyantar, Songs and Ghazals

दवा उनकी भी आजमा कर तो देखो

उन्हें नब्ज अपनी थमा कर तो देखो दवा उनकी भी आजमा कर तो देखो । अभीं पीठ कर अपनी बैठे जिधर तुमउधर अपना मुख भी घुमाकर तो देखो । दरख्तों की छाया में है चैन कितना कभी धूप में तमतमा…

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न गयी तेरी गरीबी तुम्हें माँगने न आया

न गयी तेरी गरीबी तुम्हें माँगने न आया खूँटी पर उसके कपड़ा तुम्हें टाँगने न आया । दिन इतना चढ़ गया तूँ अभीं ले रहा जम्हाई गाफिल है नींद में ही तुम्हें जागने न आया । एक अंधे श्वान सा…

Poetry, Ramyantar

पिता मैं बहुत थोड़ा हूँ तुम्हारा

माँ केन्द्रित दूसरी कविता पोस्ट कर रहा हूँ। इस कविता का शीर्षक और इसके कवि का नाम मुझे नहीं मालूम, यदि आप जानते हों तो कृपया यहाँ टिप्पणी में वह नाम जरूर लिखें। पिता मैं बहुत थोड़ा हूँ तुम्हारा और…

Poetry, Ramyantar

माँ: नौ कवितायें

कुछ दिनों पहले चिट्ठा चर्चा में कविता जी ने ’माँ’ पर लिखी कविताओं की भावपूर्ण चर्चा की थी। तब से ही मन में इसी प्रकार की कुछ कविताओं की पंक्तियाँ बार-बार स्मरण में आ रहीं थीं। बहुत याद करने पर,…

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सम्हलो कि चूक पहली इस बार हो न जाये(गज़ल)

सम्हलो कि चूक पहली इस बार हो न जाये सब जीत ही तुम्हारी कहीं हार हो न जाये। हर पग सम्हल के रखना बाहर हवा विषैली नाजुक है बुद्धि तेरी बीमार हो न जाये। अनुकूल कौन-सा तुम मौका तलाशते हो…

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जी दुखी अपना यह खंडहर देखकर

कोई भाया न घर तेरा घर देखकर जी दुखी अपना यह खंडहर देखकर। आ गिरा हूँ तुम्हारी सुखद गोद में चिलचिलाती हुई दोपहर देखकर। साँस में घुस के तुमने पुकारा हमेंहम तो ठिठके थे लम्बा सफर देखकर। अब किसी द्वार…

Poetry, Ramyantar

महसूस करता हूँ, सब तो कविता है

 (Photo credit: soul-nectar) मैं रोज सबेरे जगता हूँ दिन के उजाले की आहट और तुम्हारी मुस्कराहट साफ़ महसूस करता हूँ। चाय की प्याली से उठती स्नेह की भाप चेहरे पर छा जाती है। फ़िर नहाकर देंह ही नहींमन भी साफ़…